Showing posts with label #motherslove #माँ. Show all posts
Showing posts with label #motherslove #माँ. Show all posts

Tuesday, January 16, 2018

"क्या कोई माँ कहके के बुलाता है"

क्या वहां पर भी आपको कोई माँ कहके बुलाता है
पुत्र स्नेह का माया क्या वहां पर भी धाता है
जब ईश्वर आपसे पूछते होंगे, कुछ बतलाओ अपने बारे में
आप जरूर निःशब्द हो जाती होगी, संतति स्नेह के साये में
चर्चा वहां भी होती होगी, आपके वात्सल्य की गाथा की
प्रेम, स्नेह और ममत्व के आश्चर्यजनक परिभाषा की
मेरे चर्चे होने पर, हँसी के फव्वारे तो छूटे होंगे
नादानी के मेरे विषयों पर, सबने मुश्कान बिखेरे होंगे
बात जब आती होगी भैया की,आदर्श जरूर रेखांकित होती होगी
एक विशेष परिभाषा से रिश्तों की संज्ञान गढ़ी गई होगी
पुत्र हो या भ्रातृ स्वरुप वो हर रूप में नया युग लिख जाते हैं
आपके संस्कारों को मानो अंतर्मन में धा जाते हैं।
आप ये सब देख कर बस प्रेमभाव मुस्काती होंगी।।
हमारे वर्तमान के अवलंबों पर आशीष तो धाती होंगी !!

ईश्वर भी ये सब सुन कर अचंभित तो जरूर हुआ होगा
अपने सृजन के इस स्वरुप से , आत्ममुग्ध तो रहा होगा
पिताजी का वो इस्थितिप्रज्ञता उन्हें स्वयम् स्वरूप तो लगा होगा
आपका संघर्ष और समर्पण एक युग व्यतीत रहा होगा
मैं मानता हूँ , तभी ईश्वर भी इतना स्वार्थी बन गया होगा
आपको हमसे दूर ,निज के सानिध्य में ले गया होगा।
वो जरूर जलता होगा हमसे , जो आपको छीन ले गया हमसे
लेकिन ऐसा करके वो जरूर स्वयं से हार गया होगा
बता देना आप उनसे, हम दूर कहीं न जायेंगे
हम उसी राह पर चलकर अप्रितम इतहास बनाएंगे

पर माँ आज भी एक बात मुझे फिर से सताता है
आप सच, सच कहना,
क्या वहां पर भी कोई आपको माँ केह के बुलाता है।

भास्कर