Tuesday, October 17, 2017

संवाद

संवाद होता था और अब भी होगा, अभिव्यक्ति नहीं रुकेगी ! संज्ञान तब भी था, और आज भी है। सवाल अब भी मैं करूँगा, और जवाब भी ढूंढूंगा। काल चिंतन का व्यथा और कालचक्र का परामर्श अब भी गौण रहेगा, सदैव की तरह,वो तब भी हावी थी और अब और भी मुखर होंगी। मैं हारूँगा नहीं , मेरा अस्तित्व का संरचना कालजयी है, और उनके ममत्व का स्पर्श शाश्वत । मैं वैभव के उत्कर्ष को पराभव में परिवर्तित नहीं होने दूंगा। क्योंकि वो यही चाहती थी।
संवाद होता था और अब भी होगा।
संवाद का शब्द और अभिव्यक्ति की श्रृंखलाएँ उन्हें जिवंत रखेगा और मुझे अभिलाषी भी ।मुझे पता है, मेरे अस्तित्व और अनवरत संवाद के स्वर उनको हर्षित करेगा और मुझे  उत्प्रेरित और सजग भी। कल भी संवाद का स्वर एकाकी था और आज भी एकाकी ही होगा बस कल तक स्वर सर्वांगसम था और आज स्वर विषम होगा। मैं कल भी बस अभिव्यक्ति था और स्वर का स्वरुप वही था और अब भी वही होगा लेकिन कल तक स्वर प्रफ्फुलित और आरोही था और अब शब्द खामोश और शून्य होगा।
गोलम्बर की परिधि अब शून्यांकित है और "मैं" रूपी त्रिज्या गौण। मुझे पता है की मेरे गोलम्बर की परिधि का वर्चस्व मेरे केंद्र की उपस्थिति को अब तक महज उपस्थिति मान कर नजरअंदाज करता रहा है , मगर जब आज केंद्र गौण है तो परिधि ही संकुचित हो कर केंद्र बनता जा रहा है। केंद्र से परिधि या परिधि से केंद्र का सत्य  अब मेरे गोलम्बर को वास्तविकता से रु ब रु करवा रहा है। अब मुझे पता चल रहा है की परिधि का अस्तित्व ही केंद्र से है। अब गोलम्बर पहले की तरह उन्मुख तो नहीं रहेगा मगर हाँ संवाद अब भी करेगा।

संवाद पहले भी होता था और अब भी होगा ।।

भास्कर

No comments: