Sunday, October 11, 2015

फिर से मैं लौटूंगा

      "फिर से मैं लौटूंगा"
फिर से मै लौटूंगा, उसी प्रवालो में
उसी ठिकानों में उसी बहानों में
उस रंगीन सी तेरी पुरानी सी चादर में
जहाँ ढूंढूंगा मैं खुद को तेरी निशानी में
अपनी सदा से तेरी मेहरबानी में
विश्वास की बेला में, विमुक्त सी आंखों में
वो तेरी अदाओं में,अजनबी सी बातों में
वही अक्स फिर से मैं आँखों में डालूँगा
फिर से मैं लौटूंगा .....
फिर से मै लौटूंगा तेरे ही तरानों में..
उसी ठिकानो में उसी बहानो में
तेरी उसी बरुना के उलझन में
तेरे उस प्रेम के ब्रह्माव के साये में
प्रमोदी प्ररोचन उसी केसुओं में
उस निशेश, निशिथ, निशाबल की बाँहों में

फिर से मैं लौटूंगा तेरी ही बाँहों में
उसी ठिकानो में उसी बहानो में।।।



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